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Badrinath

4 धाम

भारत के 4 धाम

जिन स्थानों को सबसे ज्यादा पवित्र माना जाता है उनमें से 4 जगहों को 4 की उपाधि दी गयी है | इनका सीधा सम्बन्ध ईश्वर से हैं | या तो यहाँ स्वयं ईश्वर ने दर्शन दिया है या तो या पर ईश्वर स्वयं विराजमान थे |

8वीं-9वीं सदी में आदिगुरु शंकराचार्य द्वारा मौजूदा मंदिर को बनवाया था। बद्रीनाथ मंदिर के बारे में भी स्कंद पुराण और विष्णु पुराण में वर्णन मिलता है। बद्रीनाथ मंदिर के वैदिक काल (1750-500 ईसा पूर्व) भी मौजूद होने के बारे में पुराणों में वर्णन है।

माता गंगा को धरती पर लाने का श्रेय पुराणों के अनुसार राजा भगीरथ ने माता गंगा की तपस्या कर प्रसन्नकिया था उसके बाद भगवान शिव को प्रसन्न कर के धरती पर लाये थे | गोरखा लोग (नेपाली) ने 1790 से 1815 तक कुमाऊं-गढ़वाल पर राज किया था, इसी दौरान गंगोत्री मंदिर गोरखा जनरल अमर सिंह थापा ने बनाया था। उधर यमुनोत्री के असली मंदिर को जयपुर की महारानी गुलेरिया ने 19वीं सदी में बनवाया था। हालांकि कुछ दस्तावेज इस ओर भी इशारा करते हैं कि पुराने मंदिर को टिहरी के महाराज प्रताप शाह ने बनवाया था। मौसम की मार के कारण पुराने मंदिर के टूटने पर मौजूदा मंदिर का निर्माण किया गया है।

4 धाम के नाम

  1. बद्रीनाथ (उत्तराखंड): 
  2. द्वारका (गुजरात)
  3. जगन्नाथ पुरी (उड़ीसा)
  4. रामेश्वरम (तमिलनाडू )

1.बद्रीनाथ (उत्तराखंड):- बद्रीनाथ मंदिर के नाम में एक रहस्य भी छुपा हुआ है, पुराणों के अनुसार, जब भगवान विष्णु ध्यान में विलीन थे, तब उस समय ज्यादा बर्फ गिरने लगी थी, इसकी वजह से पूरा मंदिर ढक गया था। तब माता लक्ष्मी ने बद्री यानि एक बेर के पेड़ का रूप ले लिया। ऐसे विष्णु जी पर गिरने वाली बर्फ बेर के पेड़ पर गिरने लगी। इससे विष्णु जी हिमपात से बच गए, लेकिन जब सालों बाद विष्णु जी ने देवी की ये हालत देखी तो वो भावुक हो गए। उन्होंने लक्ष्मी जी से कहा कि कठोर तपस्या में भी वो उनके साथ थीं।

बद्रीनाथ धाम अलकनंदा नदी के बाएं तट पर नर और नारायएा नाम की दो पर्वत श्रृखंलाओं के बीच स्थित है। मंदिर में भगवान विष्‍णु के एक रूप में बद्रीनारायण की पूजा होती है। यहां स्‍थापित उनकी मूर्ति शालिग्राम से निर्मित है।आदि शंकराचार्य ने 8वीं शताब्‍दी में पास में स्थित नारद कुंड से निकालकर स्‍थापित किया था। इस मूर्ति को श्री हरि की स्‍वत: प्रकट हुई 8 प्रतिमाओं में से एक माना गया है।

2.द्वारका (गुजरात):- द्वारका (Dwarka) भारत के गुजरात राज्य के देवभूमि द्वारका ज़िले में स्थित एक प्राचीन नगर है। द्वारका गोमती नदी और अरब सागर के किनारे ओखामंडल प्रायद्वीप के पश्चिमी तट पर बसा है। यह सनातनियों के सप्त मोक्षपुरी तथा चारधाम में से एक है यह श्रीकृष्ण के प्राचीन राज्य द्वारका का स्थल है |

3.जगन्नाथ पुरी (उड़ीसा) :-श्री जगन्नाथ मन्दिर एक सनातन मन्दिर है, जो भगवान जगन्नाथ (श्रीकृष्ण) को समर्पित है। जगन्नाथ शब्द का अर्थ जगत के नाथ होता है। इसीलिए इनकी नगरी ही जगन्नाथपुरी या पुरी कहलाती है।यह सनातनी (वैष्णव सम्प्रदाय )का मन्दिर है, जो भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण को समर्पित है।मन्दिर की वार्षिक रथ यात्रा उत्सव प्रसिद्ध है।

इसमें मन्दिर के तीनों मुख्य देवता, भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और उनकी छोटी बहन सुभद्रा तीनों, तीन अलग-अलग भव्य और सुसज्जित रथों में विराजमान होकर नगर की यात्रा को निकलते हैं। श्री जगन्नथपुरी पहले नील माघव के नाम से पुजे जाते थे। जो भील सरदार विश्वासु के आराध्य देव थे। अब से लगभग हजारों वर्ष पुर्व भील सरदार विष्वासु नील पर्वत की गुफा के अन्दर नील माघव जी की पुजा किया करते थे | यह मंदिर वैष्णव परम्पराओं और सन्त रामानन्द से जुड़ा हुआ है। यह गौड़ीय वैष्णव सम्प्रदाय के लिये खास महत्व रखता है। इस पन्थ के संस्थापक श्री चैतन्य महाप्रभु भगवान की ओर आकर्षित हुए थे और कई वर्षों तक पुरी में निवास किया था |

4.रामेश्वरम (तमिलनाडू ):-रामेश्वरम सनातनियों का एक पवित्र तीर्थ है। यह तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले में स्थित है। यहां स्थापित शिवलिंग 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है।यहां भगवान राम ने रावण पर विजय प्राप्त करने से पहले महादेव का ऊर्जा रूपी शिवलिंग बनाकर महादेव की पूजा व्रत किया था | उनके द्वारा उनके ईश्वर का शिवलिंग बना कर पूजने से वह ज्योतिर्लिंग रामेश्वर कहलाया | यहाँ पर महादेव ने प्रभु राम को दर्शन भी दिए थे | यहाँ पर महादेव, माता तथा प्रभु राम की ऊर्जा विद्यमान मान है | यहाँ पर दर्शन करने से महादेव , माता प्रभु राम के दर्शन का फल प्राप्त होता हैं इसलिए यह स्थान 4 धामों में से एक है |

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